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इन्वेस्टर्स समिट: यूपी में 4 दिन से भूख से तड़प रही दलित लड़की ने फाँसी लगा कर दे दी जान

यूपी। इन्वेस्टर्स समिट में 4.28 लाख करोड़ का एएमयू साइन, उतने का ही पहले भारी भरकम और अब तक का सबसे बड़ा ऐतिहासिक बजट विधानसभा में पेश, सब कुछ ऐतिहासिक, उत्तर प्रदेश ऐतिहासिक और उत्तर प्रदेश सरकार ऐतिहासिक, योगी शासनकाल ऐतिहासिक और उनका अनवरत इनकाउंटर भी ऐतिहासिक। ये सब ख़बरें लगातार आपके टीवी चैनल, पेपर और मोबाइल स्क्रीन पर फ़्लैश हो रहे होंगे, लेकिन ये ख़बर शायद दबी कुचली सी दिख जाए, ठीक उसी तरह से दबी कुचली जिस तरह यहाँ के दबे कुचले जनता। अब हम जो ख़बर बताने जा रहे वो शायद आपके पल्ले बहुत ज़्यादा ना पड़े लेकिन अगर थोड़ा सा भी सोचिएगा तो बहुतो की निचली सोच उजागर हो जाएगी।

उत्तर प्रदेश के ही लखीमपुर खीरी जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। चार दिन से भूखी बच्ची मांगकर दो रोटी लाई पर भाई-बहनों में उन दो रोटी को बांटने को लेकर लड़ाई हुई। भूख से तड़प रही बच्ची ने निराश होकर फांसी लगा ली।

निघासन के नई बस्ती में रहने वाली जगराना (36) के परिवार में सब अच्छा चल रहा था। परिवार को पास छोटी सी जमीन थी, जिसमें खेती करके उनका गुजारा होता था। 8 साल पहले अचानक शारदा नदी में आई बाढ़ ने परिवार का सब तबाह कर दिया। उनकी जमीन पानी में बह गई। अब परिवार के पास मेहनत-मजदूरी करके पेट करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।

चार साल पहले उनके पिता छोटे लाल की बीमारी से मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद मां जगराना दिहाड़ी मजदूरी करके बच्चों का पेट पाल रही थी।

दिन भर मेहनत मज़दूरी करके शाम को बच्चों के लिए खाने का इंतजाम करने वाली बच्ची की मां को बीते एक हफ्ते से कोई काम नहीं मिला था। घर में जो थोड़ा बहुत अन्न था, वह भी खत्म हो गया। चार दिन से घर में खाने को कुछ नहीं था।

जगराना बच्चों को भूख से तड़पता नहीं देख पाई तो कुछ काम ढूंढने घर के बाहर गई। मां के जाने के बाद उनकी बेटी ज्योति (12) पड़ोसी के घर खाना मांगने गई। बच्ची को पड़ोसी ने दो रोटियां दीं तो वह खुशी-खुशी घर वापस आई।

बच्ची ने दो रोटियां अपने तीन भाई-बहनों लक्ष्मी (19), मोहिनी (9) और मोहित (11) में बांटीं। रोटी बराबर बांटने को लेकर उन लोगों में झगड़ा शुरू हो गया। ज्योति की बड़ी बहन लक्ष्मी गुस्से में घर के बाहर निकल गई। ज्योति इस बात से बहुत दुखी हुई और उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया। थोड़ी देर रोने-बिलखने के बाद उसने फांसी लगा ली।

हालांकि जिला प्रशासन ने ज्योति की भूख के कारण आत्महत्या करने की बात नकारी है। एसडीएम अखिलेश यादव ने उनकी जांच रिपोर्ट में कहा है कि बच्ची की मौत फांसी पर लटकने से हुई है भूख से नहीं। बच्ची की मां को विधवा पेंशन मिलती है। उसके खाते में 6 जनवरी को 1500 रुपये आए थे। वहीं उन्हें बीती 5 फरवरी को कोटे का राशन भी मिला था।

साभार: एन॰बी॰टी॰

 

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