Breaking News
Home / भाजपा / एक ऐसा पत्रकार जो अपने दृढ़ निश्चय से बना देश का पीएम, जानिए क्यों आजीवन कुँवारे रहे अटल बिहारी बाजपेयी
अटल बिहारी बाजपेयी

एक ऐसा पत्रकार जो अपने दृढ़ निश्चय से बना देश का पीएम, जानिए क्यों आजीवन कुँवारे रहे अटल बिहारी बाजपेयी

जी हाँ हम बात कर रहे भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी का। अटल बिहारी वाजपेयी एक कवि के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहते थे. लेकिन, शुरुआत पत्रकारिता से हुई. पत्रकारिता ही उनके राजनीतिक जीवन की आधारशिला बनी. उन्होंने संघ के मुखपत्र पांचजन्य, राष्ट्रधर्म और वीर अर्जुन जैसे अखबारों का संपादन किया. 1957 में देश की संसद में जनसंघ के सिर्फ चार सदस्य थे जिसमें एक अटल बिहारी वाजपेयी थी थे. संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए हिंदी में भाषण देने वाले अटल जी पहले भारतीय राजनेता थे. हिन्दी को सम्मानित करने का काम विदेश की धरती पर अटल जी ने ही किया.

राजनीतिक सेवा का व्रत लेने के कारण वो आजीवन कुंवारे रहे. उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लिए आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया था.

सबसे पहले 1955 में अटल जी पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. बाद में 1957 में गोंडा की बलरामपुर सीट से जनसंघ उम्मीदवार के रूप में जीत कर लोकसभा पहुंचे. उन्हें मथुरा और लखनऊ से भी लड़ाया गया लेकिन हार गए. अटल जी ने बीस साल तक जनसंघ के संसदीय दल के नेता के रूप में काम किया.

पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के खिलाफ जब विपक्ष एक हुआ और बाद में जब देश में मोरारजी देसाई की सरकार बनी तो अटल जी को विदेशमंत्री बनाया गया. इस दौरान उन्होंने अपनी राजनीतिक कुशलता की छाप छोड़ी और विदेश नीति को बुलंदियों पर पहुंचाया. बाद में 1980 में जनता पार्टी से नाराज होकर पार्टी का दामन छोड़ दिया. इसके बाद बनी भारतीय जनता पार्टी के संस्थापकों में वह एक थे. उसी साल उन्हें भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष की कमान सौंपी गयी. इसके बाद 1986 तक उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष पद संभाला. उन्होंने इंदिरा गांधी के कुछ कार्यों की तब सराहना की थी, जब संघ उनकी विचारधारा का विरोध कर रहा था.

अटल जी ने लाल बहादुर शास्त्री की तरफ से दिए गए नारे जय जवान जय किसान में अलग से जय विज्ञान भी जोड़ा. देश की सामरिक सुरक्षा पर उन्हें समझौता गवारा नहीं था. वैश्विक चुनौतियों के बाद भी राजस्थान के पोखरण में 1998 में परमाणु परीक्षण किया. इस परीक्षण के बाद अमेरिका समेत कई देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया. लेकिन उनकी दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति ने इन परिस्थितियों में भी उन्हें अटल स्तंभ के रूप में अडिग रखा. कारगिल युद्ध की भयावहता का भी डट कर मुकाबला किया और पाकिस्तान को धूल चटायी.

दक्षिण भारत के वर्षों पुराने कावेरी जल विवाद का हल निकालने का प्रयास भी अटल जी ने किया. स्वर्णिम चतुर्भुज योजना से देश को राजमार्ग से जोड़ने के लिए कॉरिडोर बनाया. मुख्य मार्ग से गांवों को जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री सड़क योजना बेहतर विकास का विकल्प लेकर सामने आई. कोंकण रेल सेवा की आधारशिला उन्हीं के काल में रखी गई थी.

 

संकलन-आजतक डिजिटल

Check Also

मोदी को दर्ज़नो बार जान से मारने की धमकी

मोदी को दर्ज़नो बार जान से मारने की धमकी, फिर जांच क्यों नहीं?

डेस्क।। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर जान से मारने की धमकी ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *