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गुजरात में भाजपा को हराना आसान, लेकिन मोदी को हराना उतना ही मुश्किल! गाली भी मोदी को लेकिन वोट भी मोदी को

लखनऊ/दिल्ली/राजस्थान/गुजरात. लखनऊ से दिल्ली और दिल्ली से लगभग 20 घंटे से ज्यादा गाडी चलाने के बाद राजस्थान के झक जिले में 2 घंटे का विश्राम, उस विश्राम में भी राजस्थान से सम्बन्धित बिजली पानी कि बातें, वसुंधरा सरकार पर बहुत सी बातें और फिर सरदार साहेब कि होटल से अगले गंतव्य के लिए निकल जाना, जयपुर और उसके बाद अजमेर होते हुए उदयपुर के लिए रवाना. रवाना होने के बाद फिर चाय की कमी और चाय पीने के लिए एक ढाबा, ढाबे के बाद जर्निलिज्म का पहला अध्याय शुरू. खबर को स्टेबल करने के लिए रास्ते में लगे स्ट्रीट साइन का सहारा. सहयोगी इन्टर्न जर्नलिस्ट अदिति कटियार और दिल्ली से साथ गए फॉरेन एक्सपर्ट प्रमोद पहवा. फिर क्या था कैमरा रोल एक्सन.

नमस्कार The Telegraph में आपका स्वागत है मैं हूँ घनश्याम चौरसिया, ये है नेशनल हाइवे और हम लोग राजस्थान के आखिरी छोर पर हैं और कुछ समय बाद हम गुजरात पहुचने वाले हैं और हम जा रहे…….

देखें विडियो:

परमोद पहवा, परमोद पहवा साहेब को तो आप लोगो ने बहुत से चैनल के डिबेट में देखा होगा फॉरेन मामले में एक्सपर्ट के रूप में अपना पक्ष रखते हुए लेकिन गुजरात का ट्रिप उनके लिए कत्यों खास था आप ऊपर के विडियो में बातचीत से बखूबी समझ सकतें हैं. आपको बता दें कि परमोद पहवा साहब पाकिस्तान जा रहे थे लेकिन हमारे एक फ़ोन कॉल और गुजरात विकास कि खोज ने उनको अपना रास्ता और मंजिल दोनों बदलने पर मजबूर कर दिया. गुजरात के जानकारी उनके लिए देश कि सम्प्रभुतता से सम्बंधित लग रहा था. पहवा साहब पाकिस्तान जा रहे थे, पाकिस्तान जाने के लिए वो दिल्ली से निकल भही चुके थे लेकिन वो अब गुजरात विकास की  खोज में निकल चुके थे.

यहाँ पर गाडी रुकने के बाद फिर एक चाय और यहाँ से उदयपुर के लिए रवाना. उदयपुर पहुँचते हुए रात हो जाना, फिर खाना खाने के बाद वहां रात होने से रुकने के लिए आशियाना यानि एक होटल कि खोज में लग जाना. साथ में महिला रिपोर्टर होने के कारण किसी मुफीद होटल में रुकना भी एक चुनौती. वो जगह याद नहीं लेकिन वहां हाइवे पर भी एक अच्छा होटल नहीं होने से फिर वहां से पीछे कि तरफ मुड़ना और वहां एक होटल में रुक जाना. हाँ, वो इकलौता वो जगह था जहाँ पर ग्रीन मार्बल का खनन होता है यानी ग्रीन मार्बल सिर्फ यहीं मिलता है. यहाँ होटल में रात रुकने के बाद सुबह स्थानिय लोगो से बातचीत फिर से शुरू. यहाँ के लोग बेहद सरल और आवभगत करने वाले थे, होटल में काम करने वाले मेनेजर से पता चला कि उनमे से एक उत्तर प्रदेश के इटावा से हैं और वो अपने कारोबार (ग्रीन मार्बल) के सिलसिले में राजस्थान रहते हैं. उन्होंने बताया कि जबसे यहाँ के मार्बल पर GST 28% लगाई गई है तबसे कारोबार करना तो दूर पिछली बकाया भरना मुस्किल हो गया है और तो और हरन नित नए कानून बदलाव ने तो और भी मुश्किलें खड़ा कर दी है, सरकार ग्रीन मार्बल पर विरोध के बाद जीएसटी घटा कर 22% करया है. अब जो लोग 28% पर खरीद करये हैं वो अब 22% पर बेचेंगे जिसकी पूर्ति होना नामुनकिन है. फिर इन सभी मुद्दों पर चर्चा होने के बाद वहां से भी निकलने का वक्त हो गया था, निकलने के पहले गुजरात चुनाव के कवरेज का आगाज करना था, स्ट्रेटजी क्या रहेगी और हम अन्य मीडिया से अलग कैसे दिखेंगे ये सबसे बड़ी चुनौती थी. इसको लेकर फिर हम अपने न्यूज़ वेबसाइट के ऑफिसियल फेसबुक पेज पर अगले चरण को लेकर लाइव चैट किये अपने  टीम के सबसे वरिष्ठ जर्नलिस्ट वाहिद नसीम जी के साथ. वाहिद नसीम साहेब हमारे इसी टीम के हिस्सा थे  जो दिल्ली से कवरेज के लिए कम विकास कि खोज के लिए ज्यादा मन बना कर गए थे. उनका खुद का क्या था इस टूर को लेकर सोच आप खुद सुनिए…(तकीनीकी खराबी के कारण बीच में कुछ मिनट की  विडियो में आवाज नहीं आ पाई है लेकिन पूरा विडियो देखने से आपको पता चल जायेगा कि आखिर इसका सरोकार कहाँ है)

यहाँ से फिर हिम्मतनगर और हिम्मतनगर से बात करते हुए अहमदाबाद की ओर. दो दिन अहमदाबाद कि आबोहवा से रूबरू और कुछ स्थानीय साथी जर्नलिस्टों से मुलाकात कर वहां कि जानकारी. रात में कुछ वक्त के लिए बाहर निकलना और देखना कि वास्तव में सब अपने में मस्तमौला, हाँ ट्रेफिक मामले में अहमदाबाद भी बहुत बुरे स्थिति में हैं, अधिकतर बाइकर्स बिना हेलमेट के और साफ़ सुथरा रोड पर रात के अँधेरे में चीरते हुए बाइक कि आवाज से शोर मचा देना. अहमदाबाद के लाल दरवाजे के पास एक मस्जिद का होना. सुन्दर सा मस्जिद जो देखते हुए थोडा शुकून सा प्रतीत होना और वहां पर रोड पर सोये हुए भिखारियों को देखकर थोडा बिचलित होना जैसा था. पता चला कि गोधरा काण्ड में इस मस्जिद को जला दिया गया था और वहाँ पर…..

गुजरात चुनाव 2017
गुजरात कि राजधानी अहमदाबाद के लाल दरवाजे पर सोये हुए गरीब और भिखारी
गुजरात चुनाव 2017
अहमदाबाद की शाम को रोड पर गरीबों की बस्ती
गुजरात चुनाव 2017
ऐसितिहसिक मस्जिद जिसको गोधरा कांड के दौरान जला कर राख कर दिया गया था.

अगले दिन सहयोगी इंटर्न जर्नलिस्ट अदिति कटियार के जन्मदिन पर टीम के सभी मेम्बर के साथ बाहर टहलते हुए जाने पर अदिति के मुह से तपाक से ये बात निकल जाना कि हमारे यूपी से अच्छे रात तो यहाँ लग रहे हैं क्योंकि इतनी आसानी से अकेले यूपी कि सड़कों पर निकलना इतना तो आसन नहीं होगा. इस वाकये को हमने अपने पर्सनल फेसबुक अकाउंट पर लाइव करना लेकिन इस लाइव में जो हमने देखा वो थोडा आश्चर्यजनक था. पैदल जाते हुए मन बन चूका था कि हम यहाँ से रिवर फ्रंट जायेंगे, वहां जाने के लिए रात में ही एक टैक्सी का सहारा लेना और टैक्सी वाले भाई साहब से सरकार के बारे में बात करना. हममे से किसी ने बोला लव यू मोदी जी बोल दो, सबकुछ कर्र ले गए ड्राईवर साब लेकिन लव यू मोदी नहीं बोले. उसके पीछे कई कारण दिए और कई मुद्दों से रूबरू भी करवाएं. रिवर फ्रंट पहुच चुके थे और वहां पर सिक्यूरिटी गार्ड से बातचीत करने कि कोशिश करने पर कैमेरा देखते हुए कैमरा बंद करने की बात करना और उसके बाद उसका जवाब हमे फिर से बिचलित कर रहे थे, मोदी जी को लेकर कई अप्रत्याशित सवाल और सिक्युरिटी गार्ड द्वारा अजीबोगरीब जवाब एक बार फिर कान खड़ा कर दिए. देखिये ये पर्सनल फेसबुक लाइव विडियो(नोट-इस विडियो में बहुत से पर्सनल बातों पर भी चर्चा कि गई है और बर्थडे मस्ती में थोडा अलग तरीके की बातों से भी रूबरू करवाया गया है. इस विडियो का न्यूज़ से कोई लेना देना नहीं है लेकिन इस विडियो में कुछ ऐसी वाकये कैमरे में कैद हो गई है जिसको दिखाना यहाँ पर जरुरी हो गई है)

अगला दिन, भाषा के अलावा बहुत कुछ समझ चुके थे हम लोग, कवरेज के लिए निकल भी गए थे, शाम का वक्त था जगह का नाम था गरीब्ननगर, नाम गरीबनगर और जगह भी कुछ ऐसा ही था, वहां अपर ज्यादातर उत्तर प्रदेश से लोग जाकर वहां बसे थे, यहाँ तक कि वहां के भाजपा विधायक भी उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से ताल्लुकात रखते थे यानी वो भी मूलतः उत्तर प्रदेश के थे. वहां पर भी बहुत सी बातें सामने आई जो हम लिखकर नहीं बल्कि लाइव दिखाकर बताना चाहेंगे, देखिये हमारे वरिष्ठ सहयोगी वाहिद नसीम का 4TV के लिए किया गया एक प्रोग्राम लाइव-

उपर के विडियो में जो विडियो पोस्ट करने कि बात हम कर रहे थे उस विडियो को दिखाए बिना हमारी खबर पूरी नहीं होती, हमने बिना बताये तीसरी दिमाग का उपयोग फिर से कर लिया था, जो जर्नलिज्म से जुदा क्रमशः हर व्यक्ति करता है.

 देखिये हमारा उस वक्त कि सबसे बड़ी स्पेशल विडियो

इस विडियो में बहुत सी बातें आपको समझ में आ चुकी होंगी, फिर अगला पड़ाव हमारा लालपुर इडर, लालपुर इडर पाटीदारों का एरिया था, जाहिर था वहां कि बहुत सी बातें वहां से निकल कर आने वाली थी.

द टेलीग्राफ की टीम आ पंहुची है गुजरात (गुजरात विकास मॉडल) के इडर लालपुर, यहां पर हमारी टीम ने गाँव की स्थानीय जनता से बात की. मोस्टली नगर और शहर में सिमट जाने वाली मीडिया को गाँव में देखकर लोगों में एक उम्मीद सी दिख रही थी. स्थानीय राम भाई पटेल ने बताया कि हमलोगो को बोलने नहीं दिया जाता या बोलने जाते हैं तो सुनने वाला कोई नहीं होता, ना तो सरकार ना ही चौथा स्तम्भ मीडिया। सवाल करने से पहले ये जवाब एक मीडियाकर्मी को चुभने जैसी लग रही थी.
लेकिन दिल्ली से गई टीम के लिए महज कवरेज करने से ज्यादा कुछ नहीं था. फिर क्या था शुरू हो गया मीडिया का ये रूप जिसको आप इस वक्त का जर्निलिज्म कहतें हैं. देखते देखते भीड़ जुट चुकी थी. बहुत से लोग बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन उनकी भाषा यानि गुजराती समझने की कठिनाई और उनको हिंदी से थोड़ी दुरी इस बात की तस्दीक कर रही थी कि कम्युनिकेशन गैप होने के कारण बहुत सी सच्चाई हम लोगो से दूर जा रही है. फिर भी बहुत ऐसे मुद्दे थे जिनको सुनकर आपके कान खड़े हो जाएंगे, आप सोच में पद जायेंगे की क्या यही है गुजरात विकास मॉडल जिसको लेकर पुरे देश की जनता ने मोदी को मोदी लहर का अमली जामा पहना था.

लालपुर की जनता से बात करने पर गुजरात विकास मॉडल की असल स्थिति का पता चला जिसको सुन कर आप हैरान रह जायेंगे। यहां  पाटीदार समुदाय के लोगो से भी बात की उन्होने अपनी परेशानियों के बारे में द टेलीग्राफ की टीम से  खुलकर बात  की। नोटबंदी ,जीएसटी का भी विरोध देखन को मिला मोदी के गढ़ गुजरात में।  यहां की जनता अपनी मूलभूत आवश्यकताओ को भी पूरा करने के लिए  तरह परेशान  होना पड़ रहा है उससे प्रधानमंत्री मोदी के गुजरात विकास मॉडल का असली चेहरा साफ़ नजर आ रहा है। देखिये फेसबुक लाइव का ये ग्राउंड रिपोर्ट:

उपरोक्त विडियो में बहुत सी बातें सामने आ चुकी थी, अब था ऑफ कैमरा बात करने का. नहीं तो बहुत से लोग बहुत सी बातें कहने से हिचक रहे थे. दरसल जमीनी हकीकत कैमरे पर कम बिना कैमरे पर ज्यादा आसान लाना होता हैं. वहां पर दादा ने जो हिंदी बखूबी जानते थे वो सीधे से जवाब दिए 100 बात कि एक बात गुजरात में भाजपा को हराना बहुत आसान है लेकिन मोदी को हराना बहुत मुश्किल. चाहे जो भी हो भले जोड़ तोड़ हो लेकिन सरकार बनेगी तो बीजेपी का ही बनेगी. मेरे पास अब कोई सवाल नहीं था इस जवाब के बाद. वहां से अब हम अगली पड़ाव के लिए निकल चुके थे…..

क्रमशः जारी……
आगे अभी बहुत कुछ बाकी है, बस बने रहिये हमारे साथ. लाइव विडियो देखने के लिए हमारे फेसबुक पेज @TelegraphHindi को लाइक करना ना भूलें क्योंकि हम उसी प्लेटफार्म पर दिखाते है अनकट विडियो लाइव ताकि आपकी विश्वसनीयता बनी रहे हमारे साथ.

 

प्रस्तुत: घनश्याम चौरसिया “निशांत”
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