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मोदी सरकार महगाई रोकने में हुई बुरी तरह नाकाम, देश में हर चीज के दाम बढ़ने लगे

मोदी सरकार हर मुद्दे पर बुरी तरह विफल हो चुकी है आज खाद्य पदार्थों में सब्जियों, फलों और चीनी के साथ आवास तथा बिजली एवं ईंधनों के दाम में तेज बढ़ौतरी से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई की दर अगस्त में लगातार दूसरे महीने बढ़ती हुई 5 महीने के उच्चतम स्तर 3.36 प्रतिशत पर पहुंच गई। इस साल जुलाई में महंगाई की दर 2.36 प्रतिशत और पिछले साल अगस्त में 5.05 प्रतिशत रही थी। खुदरा महंगाई का यह इस साल मार्च (3.89 प्रतिशत) के बाद का सर्वाधिक स्तर है।

सब्जियों के दाम बढ़े
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर भी मार्च के बाद के उच्चतम स्तर 1.52 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह मई, जून और जुलाई में लगातार ऋणात्मक रहने के बाद शून्य से ऊपर आई है। पिछले साल अगस्त की तुलना में इस साल अगस्त में सब्जियों के दाम 6.16 प्रतिशत, चीनी तथा कन्फैक्शनरी उत्पादों के 7.35 प्रतिशत और फलों के 5.29 प्रतिशत बढ़े हैं। खुदरा महंगाई की दर बढऩे से रिजर्व बैंक के अगले महीने ब्याज दरों में कटौती करने की संभावना कुछ कम हुई है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने पिछली समीक्षा के समय ही कहा था कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक महंगाई बढ़ने का जोखिम है।

शहरी इलाकों में महंगाई दर ज्यादा
ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी इलाकों में महंगाई दर ज्यादा रही। अगस्त में शहरी इलाकों में खुदरा महंगाई 3.35 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 3.30 प्रतिशत रही। खाद्य महंगाई ग्रामीण इलाकों में 1.38 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 1.67 प्रतिशत रही।
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विनिर्माण में ठहराव, औद्योगिक उत्पादन 1.2 प्रतिशत बढ़ा
विनिर्माण उत्पादन में लगभग ठहराव के कारण इस साल जुलाई में देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आई.आई.पी.) में 1.2 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। इससे पहले जून में विनिर्माण उत्पादन घटने से आई.आई.पी. में 0.17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी जबकि पिछले साल जुलाई में आई.आई.पी. वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत रही थी। चालू वित्त वर्ष के पहले 4 महीने में अप्रैल से जुलाई के दौरान औद्योगिक उत्पादन की समेकित वृद्धि दर 1.7 प्रतिशत रही है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 6.5 प्रतिशत रही थी। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा आज यहां जारी आंकड़ों के अनुसार आई.आई.पी. में 77.63 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन जुलाई में महज 0.1 प्रतिशत बढ़ा। इस दौरान बिजली का उत्पादन सूचकांक 6.5 प्रतिशत और खनन का 4.8 प्रतिशत बढ़ा। पिछले साल जुलाई में ये क्रमश: 2.1 प्रतिशत और 0.9 प्रतिशत बढ़े थे।

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