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श्रीदेवी के अंतिम संस्कार

श्रीदेवी के अंतिम संस्कार में राष्ट्रध्वज को कफ़न बनाने पर पुलिस से शिकायत, राष्ट्रपति,गृहमंत्री और पीएम को भी पत्र

दिवंगत फिल्म अदाकारा श्रीदेवी के अंतिम संस्कार में राष्ट्रध्वज को “कफ़न” बनाकर प्रयोग किये जानें पर लखनऊ के समाजसेवी प्रताप चन्द्र नें वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को एफआईआर दर्ज करानें हेतु शिकायत पत्र दिया, साथ ही गृह मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भी लिखा शिकायत पत्र |

प्रताप चन्द्र नें शिकायती पत्र में लिखा कि फिल्म अदाकारा श्री देवी का निधन हुआ और उनके फ्यूनरल में उनकी “डेड बॉडी” पर सीधे टकराते हुए राष्ट्रध्वज में लपेटकर कफ़न बनाकर अपमानित किया गया | देश में किसी भी नागरिक की मृत्यु दुखदाई है परन्तु हमारे देश के राष्ट्रध्वज को “कफ़न” बनाकर देश को अपमानित नहीं किया जा सकता है |

प्रताप चंद्र ने एक्ट-१९७१ का हवाला देते हुए कहा कि The Prevention of Insults to National Hon-our Act 1971- Explanation-4-d में स्पष्ट है कि Using the Indian National Flag as a drapery in any form whatsoever except in State funerals or Armed forces or other Para-Military forces funerals. इस एक्ट में साफ़ साफ़ लिखा है कि मिलिट्री, पैरा मिलिट्री और स्टेट फ्यूनरल में ही तय मानक पर राष्ट्रध्वज का प्रयोग होगा वो भी सैन्य अधिकारीयों द्वारा कोफीन बॉक्स पर, न कि डेड बाड़ी पर सीधे कफ़न बनाकर क्यूंकि कोई भी कपड़ा यदि डेड बाड़ी पर सीधे सीधे डाला जाता है तो उसे कफ़न कहते हैं

फिल्म अदाकारा श्री देवी के फ्यूनरल में उनकी “डेड बॉडी” पर सीधे टकराते हुए राष्ट्रध्वज लपेटना राष्ट्रध्वज को कफ़न बनाकर अपमानित करना है | लिहाज़ा राष्ट्रध्वज को श्री देवी के फ्यूनरल में उनकी “डेड बॉडी” पर सीधे टकराते हुए कफ़न बनाकर अपमान करनें हेतु प्राथमिकी दर्ज कराकर विधिक कार्यवाई सुनिश्चित करनें की कृपा करें |

विदित हो कि श्री देवी के मामले में स्टेट आनर था | स्टेट फ्यूनरल और स्टेट आनर में फर्क है, स्टेट आनर तो कोई राज्य अपनें विवेकानुसार दे सकता है परन्तु स्टेट फ्यूनरल राज्य सरकार के नहीं बल्कि केंद्र के अधीन होता है इसीलिए अमूमन संवैधानिक पद पर रहनें वालों को ही दिया जाता है जिसमें झंडा झुकाना भी शामिल है |

प्रताप चन्द्रा नें बताया कि जिस राष्ट्रध्वज में लिपटने के लिए जवान देश की सीमाओं पे गोली खानें को तत्पर रहते हैं उसी राष्ट्रध्वज के अपमान की शिकायत करनें हेतु कई बार लखनऊ के आशियाना थाने पर जानें से भी दर्ज नहीं की गई, आज भी जब आशियाना थाने गया तो थानाध्यक्ष श्री त्रिलोकी सिंह नें प्राथमिकी प्राप्त करनें से मना कर दिया तभी क्षेत्राधिकारी महोदया भी आ गई उनसे बताने पर उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारीयों से मिलिए वो ही मदद करेंगे, सुनकर बेहद अफ़सोस हुआ कि राष्ट्रध्वज के अपमान जैसे संवेदनशील विषय पर न सिर्फ इतना ढुलमुल रवैया है बल्कि ऐसा प्रतीत हुआ मानो मेरा पर्स खो गया हो जिसकी रिपोर्ट करनें आये हैं |

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