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मोदी को दर्ज़नो बार जान से मारने की धमकी

मोदी को दर्ज़नो बार जान से मारने की धमकी, फिर जांच क्यों नहीं?

डेस्क।। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर जान से मारने की धमकी गई है।  धमकी ही नहीं बल्कि पुलिस ने बकायदा एक ऐसा लेटर जारी किया है जिसमे मारने, मारने का तरीका, मारने का कारण और मारने का वक्त तक तैयार किया गया है। किसी भी देश के लिए प्रधानमंत्री की सुरक्षा सर्वोच्च सुरक्षा होती है और उसको तोड़ पाना लगभग नामुनकिन होता है लेकिन असंभव नहीं। उदहारण के तौर पर आप राजीव गाँधी हत्याकांड को ले सकते हैं।

प्रधानमंत्री को जान से मारने की धमकी ये पहली बार नहीं है, इसके पहले दर्ज़नो बार मोदी  को जान से मारने की धमकी दी जा चुकी है।  हर बार मामला पुरे देश में आग की तरह फ़ैल जाती है।  लेकिन बाद में जांच और कारण का पता नहीं लग पाता है।  जिसको लेकर धमकी और धमकी के तरीके संदेहास्पद हो जाते है।  प्रधानमंत्री की सुरक्षा आतंरिक और गोपनीय होता है।  जरुरी नहीं कि उसके जांच और कार्यवाही को सार्वजनिक किया जाए लेकिन सवाल ये है कि जब जांच और कार्यवाही सार्वजनिक नहीं किया जाता है तो मारने की धमकी और लेटर को क्यों प्रचारित किया जाता है। क्या वो सुरक्षा और गोपनीयता के साथ खिलवाड़ नहीं होता है।

अब हाल ही में मिले लेटर और मोदी को जान से मारने के प्लान के बारे में बात करते हैं। जहाँ से ये लेटर मिला और जब मिला उसके बारे में सबसे पहले हम आपको बता दे। गौरतलब है कि जनवरी माह में महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के मामले में पुणे पुलिस ने 5 लोगों की गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान पुणे पुलिस अनुसार एक आरोपी के घर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जान से मारने वाले प्लान वाला पत्र मिला था। भीमा कोरेगांव में दलित स्थानीय मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे वहां पर कुछ उपद्रवी आकर हिंसा फैला दिए जिसमे कुछ लोगो की जान चली गई और तोड़ फोड़ से वहां काफी नुकसान हुआ।

मोदी को दर्ज़नो बार जान से मारने की धमकी
मोदी को दर्ज़नो बार जान से मारने की धमकी

 

उस लेटर के अनुसार पुलिस के दावे को मानें तो नक्सली राजीव गांधी की हत्याकांड की तर्ज़ पर प्रधानमंत्री मोदी पर हमले की योजना बना रहे थे। बता दें कि भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच के दौरान जब पुलिस ने रोना विल्सन, सोमा सेन, सुधीर धवले, सुरेंद्र गाडलिंग जैसे लोगों को गिरफ़्तार किया तब ये आरोप लगा कि वह असली गुनहगारों को छोड़ रही है लेकिन अचानक अब ये जांच प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश की ओर मुड़ चुकी है।

पिछले 10 सालों में लगातार पीएम मोदी अलग अलग तरह से धमकी मिली है। मगर किसी भी धमकी की जांच कितनी और कहाँ तक पहुंची ये या तो सिर्फ पीएम मोदी जानते है या फिर उनकी सुरक्षा देखने वाले लोग। प्रधानमंत्री देश के लिए सुरक्षा का भरोसा होता है ऐसे में अगर उसे ही धमकी मिलनी शुरू हो जाये तो समझा जा सकता है देश में खुफिया विभागों की चूक कहाँ हो रही है।

इस लेटर की माने तो रिसीव करने वाले का नाम जाहिर तो है लेकिन भेजने वाले का नाम नहीं लिखा गया है। इस लेटर में नक्सलवादियों, दलितों और मोदी के हिंदुत्व को निशाना बनाया गया है।  नक्सलवादी हमेशा अपने अधिकार के लिए लड़ते हैं उनकी हिंदुत्व और फासीवादी ताकतों से आजतक कोई मतलब नहीं रहा हैं लेकिन अचनाक दलित नक्सकलवादी बनकर हिंदुत्व के खिलाफ कैसे लड़ने लगे इसका अंदाज़ा शायद जांच  एजेंसियों को भी नहीं होगी। हालाँकि अब पुलिस को इस चिट्ठी के अलावा और भी सबूत जुटाने होंगे जिनसे ये साबित हो कि इस इरादे को बाक़ायदा साज़िश की शक्ल दी गई। जबकि कई सामाजिक संगठनों ने कहा कि ये अंबेडकरवादी आंदोलन को कुचलने की कोशिश है।

वही आईपीएस संजीव भट्ट का एक ट्वीट काफी वायरल हो रहा है, देखें-

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